🐶✨ अनोखी आस्था: झांसी के “कुतिया महारानी मंदिर” की दिल छू लेने वाली कहानी
भारत की धरती पर हजारों मंदिर हैं — किसी में भगवान शिव विराजते हैं, कहीं माता दुर्गा, तो कहीं श्रीराम। लेकिन झांसी के एक छोटे से गांव में एक ऐसा मंदिर है, जिसकी कहानी सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। यहां पूजा होती है किसी राजा-रानी की नहीं, बल्कि एक साधारण कुतिया की, जिसे लोग देवी का दर्जा देकर “कुतिया महारानी मां” कहते हैं।
यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि संवेदनाओं और करुणा का ऐसा अद्भुत प्रतीक है जो इंसान और जानवर के रिश्ते को एक नए नजरिये से देखने को मजबूर कर देता है। इसकी कहानी में प्रेम, भूख, दर्द और श्रद्धा — सभी भावनाएं समाई हुई हैं।
📍 मंदिर का स्थान और महत्व
उत्तर प्रदेश के झांसी जिले की मऊरानीपुर तहसील में स्थित, गांव रेवन और ककवारा की सीमा पर एक ऐसा मंदिर है जो अपनी अद्वितीय परंपरा के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है — “कुतिया महारानी मंदिर”। यह मंदिर न तो देवी-देवताओं का पारंपरिक स्थान है, न ही किसी ऐतिहासिक राजा-रानी की स्मृति, बल्कि यहां पूजा होती है एक कुतिया की, जिसे लोग देवी का दर्जा देकर “कुतिया महारानी मां” कहते हैं।
📖 किवदंती: एक भूखी कुतिया की करुण कहानी
कहानी के अनुसार, इन दोनों गांवों के बीच एक कुतिया रहती थी। गांव में जब भी कोई सामाजिक या मांगलिक कार्यक्रम होता, वह वहां भोजन पाने पहुंच जाया करती थी।
एक दिन, रेवन गांव में समारोह था, लेकिन खाना तैयार नहीं हुआ था, और कुतिया को कुछ नहीं मिला। वह थकते-थकते ककवारा गांव पहुंची, पर वहां भी भोजन तैयार नहीं था। भूख और थकान से चूर वह दोनों गांवों के बीच ही गिरकर तड़पते-तड़पते मर गई।
🪔 श्रद्धा में बदली संवेदना
गांव वालों को यह घटना बहुत दुखी कर गई। उन्होंने उसी स्थान पर कुतिया की समाधि बना दी। बाद में यहां सफेद पत्थर का चबूतरा और फिर कुतिया की मूर्ति स्थापित की गई।
धीरे-धीरे यहां पूजा-अर्चना शुरू हुई, और आज यह स्थान भक्तों के लिए मन्नतें पूरी करने वाला मंदिर बन गया है।
🙏 परंपराएँ और आस्था
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भोग और निमंत्रण पहले कुतिया महारानी को: गांव में जब भी कोई शादी, पूजा या समारोह होता है, सबसे पहले कुतिया महारानी को निमंत्रण पत्र और भोग अर्पित किया जाता है।
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नियमित पूजा-अर्चना: सुबह और शाम यहां पूजा होती है, जिसके लिए पुजारी नियुक्त हैं।
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दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु: न सिर्फ आसपास के गांव, बल्कि अन्य जिलों से भी लोग यहां मन्नतें मांगने आते हैं।
🌸 आस्था का संदेश
इस मंदिर की कहानी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह वफादारी, करुणा और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का अद्भुत उदाहरण है। यह हमें याद दिलाता है कि इंसान और जानवर के बीच का रिश्ता सिर्फ सहअस्तित्व का नहीं, बल्कि भावनाओं और संवेदनाओं का भी है।
🗺️ कैसे पहुंचे?
“कुतिया महारानी मंदिर” मऊरानीपुर तहसील के रेवन और ककवारा गांवों की सीमा पर स्थित है। झांसी शहर से यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
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(डिसक्लेमर/अस्वीकरण)
इस लेख में वर्णित जानकारी, कथा और मान्यताएं स्थानीय लोककथाओं, ग्रामीण परंपराओं और क्षेत्रीय विश्वासों पर आधारित हैं। हमने इसे पूरी सावधानी से संकलित और प्रस्तुत किया है, किंतु इसकी ऐतिहासिक सटीकता, पूर्णता या प्रमाणिकता की हम कोई गारंटी नहीं देते। यह लेख केवल सूचना और सांस्कृतिक परिचय के उद्देश्य से है। पाठक इसे मात्र एक पारंपरिक/सांस्कृतिक संदर्भ के रूप में ग्रहण करें। किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान, मान्यता या आस्था का पालन करना पाठक की व्यक्तिगत श्रद्धा और निर्णय पर निर्भर करेगा।